गंगा नदी को भारत में एक पवित्र, साफ और जीवनदायिनी नदी माना जाता है। गंगा का पानी के शुद्ध होने के क्या कारण हैं ?

आज के इस आर्टिकल में ये हम ये जानेंगे

गंगा का पानी शुद्ध क्यों है

गंगा नदी का पानी शुद्ध क्यों होता है

ganga ka pani shudh kyon hota hai

गंगा का पानी खराब क्यों नहीं होता है

ganga ka pani saaf kyon rahata hai

ganga ka pani kharab kyu nahi hota

ganga ke pani mein kide kyon nahin padte

ganga nadi ka pani saaf kyon rahata hai

ganga ka pani ganda kyon nahin hota hai

गंगा का पानी के शुद्ध होने के पीछे कई वैज्ञानिक, धार्मिक और भौगोलिक कारण हैं, जो इसे अन्य नदियों से अलग बनाते हैं।

1. गंगा जल में प्राकृतिक बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages) की उपस्थिति

गंगा के पानी में एक विशेष प्रकार के वायरस पाए जाते हैं, जिन्हें बैक्टीरियोफेज कहा जाता है। ये वायरस हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं, जिससे पानी को लंबे समय तक शुद्ध बनाए रखने में मदद मिलती है। यही कारण है कि गंगा जल को रखने पर भी खराब नहीं होता और यह जीवाणुनाशक गुणों से भरपूर होता है।

2. गंगा का जल प्रवाह और आत्मशुद्धिकरण क्षमता

गंगा नदी का प्रवाह बहुत तेज होता है, जिससे इसमें जल ठहरता नहीं बल्कि निरंतर बहता रहता है। निरंतर धारा बहने से गंदगी और अशुद्धियाँ जम नहीं पातीं। साथ ही, गंगा जल में बायोरिमेडिएशन (Bioremediation) क्षमता होती है, जिससे यह स्वयं को प्रदूषण से मुक्त करने की क्षमता रखता है।

3. गंगा जल में पाए जाने वाले औषधीय गुण

गंगा नदी का उद्गम हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर से होता है।गंगा के जल में हिमालय की जड़ी-बूटियों और खनिज तत्वों (Minerals) का मिश्रण होता है। जब यह नदी हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती है, तो इसमें मौजूद औषधीय तत्व इसे प्राकृतिक रूप से शुद्ध और रोगाणुरहित बना देते हैं। इन तत्वों में मुख्य रूप से सल्फर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य खनिज शामिल होते हैं, जो जल को प्राकृतिक रूप से संरक्षित रखते हैं।

4. धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता

भारत में गंगा को माँ गंगा कहा जाता है और इसे एक दिव्य नदी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि गंगा जल में स्नान करने और इसका सेवन करने से पापों का नाश होता है और यह आध्यात्मिक शुद्धिकरण का माध्यम बनता है। कई साधु-संत और ऋषि-मुनि भी गंगाजल को जीवनदायिनी मानते हैं।

5. गंगा जल को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है

गंगा जल की एक और खासियत यह है कि इसे बिना किसी केमिकल ट्रीटमेंट के भी लंबे समय तक खराब नहीं होने दिया जा सकता है। अगर सामान्य जल को एक बोतल में रख दिया जाए, तो कुछ दिनों बाद उसमें दुर्गंध आने लगती है और उसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। लेकिन गंगा जल को सालों तक भी रखने पर उसमें दुर्गंध नहीं आती और यह पहले की तरह स्वच्छ बना रहता है।

6. प्राकृतिक जैविक क्रियाएं

गंगा नदी के पानी में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो इसे आत्मशुद्धि (self-purification) की क्षमता प्रदान करते हैं। इससे इसमें डाले गए अपशिष्ट भी जल्दी नष्ट हो जाते हैं।

निष्कर्ष :-

गंगा का पानी शुद्ध होने के पीछे वैज्ञानिक, भौगोलिक और धार्मिक पहलू जुड़े हुए हैं। इसके पानी में प्राकृतिक बैक्टीरियोफेज, उच्च ऑक्सीजन स्तर, औषधीय तत्व और हिमालय की मिट्टी के गुण शामिल होते हैं, जो इसे स्वच्छ और विशेष बनाते हैं। यही वजह है कि गंगा जल को अमृत के समान माना जाता है और इसे हिंदू संस्कृति में दिव्य और पवित्र स्थान प्राप्त है। औद्योगिक प्रदूषण और मानव जनित कचरे के कारण गंगा का जल अब पहले जैसा शुद्ध नहीं रहा। फिर भी, इसकी प्राकृतिक शुद्धिकरण क्षमता अन्य नदियों की तुलना में अधिक मानी जाती है।

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